जारा सोच विचार कर लो कही तो साज़िश हुई है !
जो कल परसों तक गर्दन नापते थे हमारी,
ज़िद में अडे थे हम भी नहीं जायेंगे उसके चौखट पर,
बिखरे से थे साख और दिल पे उदासी छाई है !!
ढकोसलों के शहर में दीवाली आई है !!
बात बात पर कहते थे हमें, तु क्या चीज हो !!
आज उसी बारूद खाने में इक चिंगारी आई है !
इम्तहान मत लो मेरे सब्र का यह “सरगम”,
सारे जहाँ मे क़यामत आई है!!









